Naveen samachar chhattisgarh
Tuesday, June 16, 2026
Monday, June 15, 2026
VSK एप का सर्वर ठप, शिक्षकों की बढ़ी चिंता: ऑनलाइन उपस्थिति नहीं होने पर वेतन कटौती का जिम्मेदार कौन?
स्कूल खुलते ही प्रदेश भर के शिक्षक परेशान
दुर्ग/रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के शिक्षकों को VSK एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, निर्धारित समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों के उस दिन का वेतन काटने संबंधी आदेश भी जारी किया गया है।
इसी बीच मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से VSK एप का सर्वर डाउन होने एवं तकनीकी खामियों के कारण शिक्षकों के ऑनलाइन चेक-इन नहीं हो पाने की शिकायतें सामने आई हैं। कई शिक्षकों ने स्क्रीनशॉट साझा कर बताया कि नेटवर्क एवं सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण घंटों प्रयास करने के बावजूद उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।
प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पहले से ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में केवल ऑनलाइन माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था ने शिक्षकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। शिक्षकों का कहना है कि यदि तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है तो इसके लिए संबंधित शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।
नवीन शिक्षक संघ ने इस पूरे मामले में विभाग से गंभीरतापूर्वक विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि तकनीकी खामियों के चलते किसी भी शिक्षक का वेतन काटने जैसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
वर्जन
"ग्रामीण क्षेत्रों में VSK एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में शिक्षकों को नेटवर्क संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। नेटवर्क या सर्वर की समस्या के कारण यदि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है और ऐसी स्थिति में शिक्षकों का वेतन काटा जाता है, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इस संबंध में विभाग को गंभीरता से विचार करना चाहिए। ऑनलाइन उपस्थिति के बजाय प्रदेश के सभी स्कूलों में बायोमेट्रिक डिवाइस लगाए जाने चाहिए, जिससे पारदर्शिता के साथ-साथ तकनीकी समस्याओं से भी बचा जा सके।"
— विकास सिंह राजपूत
प्रदेश अध्यक्ष, नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़
Saturday, June 13, 2026
भीषण गर्मी व जल संकट को देखते हुए 16 जून से स्कूल खोलने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग
रायपुर - नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी एवं उमस को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 जून 2026 से स्कूल खोलने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने माननीय शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन से इस विषय पर गंभीरता से संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
वर्जन :
वर्तमान में प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भीषण गर्मी और अत्यधिक उमस का वातावरण बना हुआ है। ऐसे समय में छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
विकास सिंह राजपूत प्रदेश अध्यक्ष (नवीन शिक्षक संघ छ. ग.)
महिला प्रकोष्ठ प्रदेश पदाधिकारी उमा जाटव, बलविंदर कौर, गंगा शरण पासी, नंदिनी देशमुख, ज्योति सक्सेना, गीता चंद्राकर, रूपा साहू ने सुझाव दिया है कि स्कूलों का संचालन 1 जुलाई 2026 से प्रारंभ करने पर विचार किया जाना चाहिए।
प्रदेश पदाधिकारी गिरीश साहू, अमितेश तिवारी, दुष्यंत कुम्भकार, रूपेंद्र सिन्हा, संजय साहू, अजय कड़व, प्रकाश चंद कांगे, सतीस टंडन, चंद्रशेखर रात्रे, राजेश शुक्ला, ब्रिज नारायण मिश्रा, शंकर लाल भार्गव, मनोज चंद्रा ने आगे कहा की प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में भू-जल स्तर में गिरावट के कारण नलकूप एवं बोरिंग से पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
संजीव मानिकपुरी, वेद प्रकाश साहू, छन्नू लाल साहू, रमन शर्मा, हरिकांत अग्निहोत्री, अमित मैसी, वेदराम साहू, चंद्रिका पाण्डेय ने कहा कि विद्यालयों में पर्याप्त पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना स्कूल खोलना उचित नहीं होगा। इसलिए विद्यार्थियों के स्वास्थ्य हित को ध्यान में रखते हुए 16 जून से स्कूल खोलने के निर्णय पर एक बार पुनर्विचार कर आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए।
Wednesday, June 10, 2026
राजपत्र प्रकाशन के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत एवं सेवा सुरक्षा की मांग, प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया मांग पत्र
रायपुर, 10 जून। नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ द्वारा राजपत्र प्रकाशन के पूर्व नियुक्त एवं पदोन्नत शिक्षकों को TET अनिवार्यता से मुक्त रखते हुए उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, भारत सरकार, केंद्रीय शिक्षामंत्री एवं सचिव, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार को ईमेल तथा स्पीड पोस्ट के माध्यम से मांग पत्र प्रेषित किया गया।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने बताया कि वर्ष 2017 में एनसीटीई द्वारा टीईटी संबंधी संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिसके कारण राजपत्र प्रकाशन से पूर्व नियुक्त एवं पदोन्नत हजारों शिक्षक अनावश्यक प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। जबकि कई राज्यों में ऐसे शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए राहत प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अर्जित अधिकारों एवं सेवा सुरक्षा को बनाए रखना आवश्यक है।
मांग पत्र में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि राजपत्र प्रकाशन अथवा संशोधित नियम लागू होने से पूर्व नियुक्त एवं पदोन्नत शिक्षकों को TET अनिवार्यता से मुक्त किया जाए तथा केवल TET की अनुपलब्धता के आधार पर किसी भी शिक्षक की सेवा, पदोन्नति एवं वेतन संबंधी लाभ प्रभावित नहीं किए जाएं। साथ ही सभी राज्यों के लिए एक समान दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
संघ ने यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2017 से 2026 तक बिना TET उत्तीर्ण किए अनेक शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान की गई है, ऐसे में शेष बचे शिक्षकों के लिए TET को सेवा सुरक्षा का आधार बनाना न्यायोचित नहीं है। इसलिए मानवीय एवं न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाते हुए पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत प्रदान की जानी चाहिए।
स्पीड पोस्ट के माध्यम से मांग पत्र प्रेषित किए जाने के दौरान विकास सिंह राजपूत, उमा जाटव, गिरीश साहू, दुष्यंत कुंभकार, अमितेश तिवारी, संजीव मानिकपुरी, नंदिनी देशमुख, गीता चंद्राकर, संजय शर्मा, दीपक साहू, विनोद ठाकुर, राकेश धनकर एवं मनोज जोशी उपस्थित रहे।
नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार से शिक्षकों के व्यापक हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
Tuesday, June 9, 2026
टीईटी-बी.एड. राहत की मांग को लेकर संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग दुर्ग से मिले नवीन शिक्षक संघ के प्रतिनिधि
दुर्ग, 09 जून 2026। नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के नेतृत्व में संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग दुर्ग से मुलाकात कर वर्ष 2017 के एनसीटीई/आरटीई संशोधन से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी एवं बी.एड. अनिवार्यता से राहत प्रदान करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
संघ ने ज्ञापन में बताया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत वर्ष 2017 में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यताओं में संशोधन किया गया, जिसके बाद प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी तथा पदोन्नति हेतु बी.एड. योग्यता को अनिवार्य माना जाने लगा। संघ का तर्क है कि इस संशोधन से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन प्रचलित नियमों एवं योग्यताओं के आधार पर हुई थी, इसलिए उन पर बाद में लागू किए गए प्रावधानों का प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाला जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2017 से अप्रैल 2026 तक स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अनेक शिक्षकों की बिना टीईटी एवं बिना बी.एड. के पदोन्नति की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय स्तर पर इन प्रावधानों का एक समान पालन नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में शेष बचे शिक्षकों को पदोन्नति एवं सेवा लाभों से वंचित करना प्राकृतिक न्याय एवं समानता के सिद्धांतों के विपरीत होगा।
संघ ने मांग की कि वर्ष 2017 के पूर्व नियुक्त समस्त शिक्षकों को टीईटी एवं बी.एड. अनिवार्यता से पूर्ण छूट प्रदान की जाए, साथ ही 2017 से 2026 के बीच पदोन्नत शिक्षकों के समान शेष पात्र शिक्षकों को भी राहत दी जाए। इसके अतिरिक्त सेवारत शिक्षकों के लिए एकमुश्त विशेष शिथिलीकरण (One Time Relaxation) प्रदान करने तथा टीईटी अथवा बी.एड. के अभाव में किसी भी शिक्षक की पदोन्नति, वेतनवृद्धि, क्रमोन्नति अथवा अन्य सेवा लाभ प्रभावित नहीं करने के स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग भी की गई।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के हजारों शिक्षक वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ऐसे शिक्षकों के अर्जित सेवा अधिकारों की रक्षा करना शासन की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शासन शिक्षक हितों एवं व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेकर प्रभावित शिक्षकों को राहत प्रदान करेगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश, संभाग एवं जिला स्तर के पदाधिकारी एवं शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वर्जन – विकास सिंह राजपूत, प्रदेश अध्यक्ष, नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़:
"वर्ष 2017 के संशोधन से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवाएं तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई हैं। वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षकों के अर्जित अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें टीईटी एवं बी.एड. अनिवार्यता से राहत प्रदान की जानी चाहिए, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।"
तथ्य: वर्ष 2017 में शिक्षक शिक्षा संबंधी नियमों में संशोधन के बाद न्यूनतम योग्यताओं के प्रावधानों को लेकर विभिन्न राज्यों में व्याख्या एवं न्यायिक परीक्षण की स्थिति बनी रही है।
प्रतिनिधिमंडल मे प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष उमा जाटव प्रदेश सचिव गिरीश साहू, प्रदेश कोषाध्यक्ष अमितेश तिवारी, संगठन मंत्री दुष्यन्त कुंभकार, महिला प्रकोष्ठ सचिव नंदिनी देशमुख, जिला अध्यक्ष संजीव मानिकपुरी, ब्लॉक अध्यक्ष धमधा संजय शर्मा, दुर्ग दीपक साहू, गीता चंद्राकर, विनोद ठाकुर, राकेश धनकर, मनोज जोशी, छगन लाल गेंड्रे, अशोक देवांगन, अनिल मार्कण्डेय, तीरथ मार्कण्डेय आदि शामिल
Friday, June 5, 2026
शासकीय कर्मचारियों के कैशलेस इलाज के दिशा-निर्देश जारी करने की मांग, स्वास्थ्य संचालक से मिला नवीन शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल
विधानसभा बजट सत्र मे केसलेस इलाज की घोषणा के महीनो बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को केसलेस इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है शासन स्तर पर जल्दी ही दिशा -निर्देश जारी होना चाहिए - विकास सिंह
रायपुर। प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की दिशा में नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने पहल करते हुए स्वास्थ्य विभाग के संचालक से मुलाकात कर शीघ्र दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि विधानसभा के बजट सत्र में प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज सुविधा की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। इसके कारण कर्मचारियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
संघ ने स्वास्थ्य विभाग से आग्रह किया कि शासन स्तर पर जल्द से जल्द आवश्यक आदेश एवं दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी और उनके परिवार बिना आर्थिक परेशानी के गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कैशलेस इलाज व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों को गंभीर बीमारी या आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल उपचार उपलब्ध हो सकेगा तथा उन्हें इलाज के लिए आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर विषय पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है। नवीन शिक्षक संघ ने उम्मीद जताई है कि कर्मचारियों के हित में जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
मुख्य बिंदु
🔹 बजट सत्र में हुई थी कैशलेस इलाज की घोषणा
🔹 अब तक जारी नहीं हुए हैं संचालन संबंधी दिशा-निर्देश
🔹 नवीन शिक्षक संघ ने स्वास्थ्य संचालक को सौंपा ज्ञापन
🔹 कर्मचारियों को शीघ्र लाभ दिलाने की मांग
🔹 प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
Wednesday, June 3, 2026
शिक्षक पदोन्नति सूची में भारी गड़बड़ी: नवीन शिक्षक संघ ने सचिव को सौंपा ज्ञापन, सूची निरस्त करने की मांग
रायपुर | 04 जून 2026 छत्तीसगढ़ में शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात की। संघ ने पदोन्नति हेतु जारी वरिष्ठता सूची में व्याप्त गंभीर त्रुटियों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए एक मांग पत्र सौंपा है।
वरिष्ठता सूची पर उठे गंभीर सवाल
प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी सूची में विसंगतियों की भरमार है। प्रमुख आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
उल्टा हुआ क्रम: कई वरिष्ठ शिक्षकों को कनिष्ठ (Junior) और कनिष्ठों को वरिष्ठ (Senior) दर्शाया गया है।
विषय की त्रुटि: कला संकाय के शिक्षकों को विज्ञान और गणित विषय का बता दिया गया है।
पुरानी सूची का दोहराव: पदाधिकारियों का आरोप है कि विभाग ने मेहनत करने के बजाय अप्रैल 2025 की पुरानी सूची को ही बिना संशोधन के दोबारा चस्पा कर दिया है।
मृत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम: सूची में उन शिक्षकों के नाम भी शामिल हैं जिनका निधन हो चुका है या जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यहाँ तक कि पदोन्नति का त्याग करने वाले शिक्षकों के नाम भी बिना किसी टिप्पणी के शामिल हैं।
संघ की प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल में शामिल गिरीश साहू, उमा जाटव और अन्य पदाधिकारियों ने सचिव से स्पष्ट मांग की है कि:
वर्तमान त्रुटिपूर्ण वरिष्ठता सूची को तत्काल निरस्त किया जाए।
संभाग और जिला स्तर से अद्यतन (Updated) जानकारी मंगाकर अपात्र, दिवंगत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम हटाए जाएं।
01 अप्रैल 2026 की स्थिति के आधार पर नई और त्रुटिरहित सूची प्रकाशित कर दावा-आपत्ति मंगाई जाए।
"विभाग द्वारा मृत और रिटायर्ड शिक्षकों के नाम सूची में रखना प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। जब तक सूची सुधारी नहीं जाती, पात्र शिक्षकों के साथ न्याय नहीं होगा।" - प्रतिनिधिमंडल, नवीन शिक्षक संघ
सचिव ने दिया सुधार का आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान शिक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रक्रिया 01 अप्रैल 2025 की स्थिति के अनुसार की जा रही है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि सूची में तकनीकी या मानवीय त्रुटियां हैं, तो उनका गंभीरता से परीक्षण कर सुधार कराया जाएगा। सचिव ने यह भी कहा कि जल्द ही 01 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार नई वरिष्ठता सूची जारी करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल:
विकास सिंह राजपूत, गिरीश साहू, प्रकाश चंद कांगे, मनोज चंद्रा, बृजनारायण शर्मा, उमा जाटव, गंगाशरण पासी, बलविंदर कौर, तीरथ मार्कण्डेय, अशोक देवांगन सहित संघ के अन्य प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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