Wednesday, September 9, 2026

11 सितंबर को होगा इंद्रवती भवन मंत्रालय का घेराव महंगाई भत्ता व पेंशनरो को केसलेस चिकित्सा योजना मे शामिल करने की मांग नवीन शिक्षक संघ छ. ग. का समर्थन शिक्षक सहित अन्य कर्मचारी बड़ी संख्या मे होंगे प्रदर्शन मे शामिल


86 महीने की लंबित महंगाई भत्ता सरकार को जल्दी ही भुगतान हेतु निर्णय लेना चाहिए साथ ही केसलेस चिकित्सा हेतु पेंशनरो को भी भी इस महत्वपूर्ण योजना मे शामिल करना चाहिए - विकास सिंह राजपूत 

रायपुर - नवीन शिक्षक संघ छ. ग. के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह  राजपूत ने कहा है की 86 महीने से लंबित महंगाई भत्ते पर कर्मचारी संगठनों के लगातार मांग व शासन से बातचीत के बाद भी कोई निर्णय नही लेने पर एक मांग एक मंच के बैनर तले 11 सितंबर को रायपुर मंत्रालय इंद्रावती भवन के गेट नंबर 3 के पास शिक्षक सहित अन्य शासकीय कर्मचारी बड़ी संख्या मे एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन करने के पश्चात इंद्रावती भवन के घेराव कर 86 महीने के लंबित महंगाई भत्ते, पेंशनरो को भी केसलेस चिकित्सा योजना मे शामिल करने सहित अन्य मांगो पर शासन का ध्यानाकर्षण कराया जायेगा कर्मचारी हित मे नवीन शिक्षक संघ छ. ग. द्वारा एक मांग एक मंच के बैनर मे होने वाले इस प्रदर्शन का पूर्ण रूप से समर्थन करता है और शिक्षक सहित अन्य कर्मचारियों से आह्वान करता है की 11 सितंबर को धरना प्रदर्शन मे शामिल होकर अपने आर्थिक अधिकार के लिए शासन प्रशासन तक जोरदार विरोध दर्ज कराये।

प्रदेश पदाधिकारी गिरीश साहू, अमितेश तिवारी, दुष्यन्त कुम्भकार, राजेश शुक्ला, नरेश गुप्ता, रूपेंद्र सिन्हा, संजय साहू, अजय कड़व, प्रकाशचंद कांगे, चंद्रशेखर रात्रे, सतीस टंडन, मनोज चंद्रा, शंकरलाल भार्गव, ब्रिज नारायण मिश्रा, सैय्यद रफीक ने आगे कहा की कांग्रेस सरकार मे महंगाई भत्ता रोकने की परिपाटी कोरोना काल मे विपरीत परिस्थिति को देखते हुए बनाया गया था परिस्थिति ठीक होने के बाद भी महंगाई भत्ता पर कोई निर्णय नही लेने के कारण कर्मचारी जगत का गुस्सा विधानसभा चुनाव मे दिखा और उसके बाद प्रदेश मे भाजपा की सरकार आई और मोदी की गारंटी मे लंबित महंगाई भत्ता देने का वादा भाजपा द्वारा चुनावी घोषणा पत्र मे किया गया था लेकिन आज दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लंबित महंगाई भत्ता पर निर्णय नही होने से प्रदेश के शिक्षक व कर्मचारियों के मन मे निराशा के साथ - साथ आक्रोश भी है और यही आक्रोश को दिखाने के लिए प्रदेश के कर्मचारी अपने महंगाई भत्ता की मांग को लेकर 11 सितंबर 2026 को रायपुर पहुंचेंगे।

महिला प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी उमा जाटव, गंगा शरण पासी, बलविंदर कौर, नंदिनी देशमुख, ज्योति सक्सेना, रूपा साहू, गीता चंद्राकर ने महिला शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों से अपील किया है की 11 सितंबर 2026 को एक बजे तक मंत्रालय स्थिति इंद्रावती भवन के गेट नंबर 03 मे अपने लंबित महंगाई भत्ते की मांग को लेकर एक मांग एक मंच के बैनर जरूर प्रदर्शन मे शामिल हो सभी पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा की 86 महीने की लंबित महंगाई भत्ता कर्मचारियों की मांग नही है बल्कि मोदी की गारंटी मे सत्ता मे बैठे पार्टी द्वारा चुनावी घोषणा पत्र मे स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था साथ ही वर्तमान वित्तमंत्री छ. ग. शासन द्वारा चुनाव के समय वीडियो संदेश जारी कर प्रदेश के समस्त कर्मचारियों को लंबित महंगाई भत्ता व केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने का वादा किया गया था लेकिन वर्तमान मे दोनों वादों पर कोई निर्णय नही लेने के कारण प्रदेश के कर्मचारियों को धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है सभी कर्मचारियों से अपील है की अपने आर्थिक अधिकार के लिए बड़ी सांख्य मे 11 सितंबर 2026 को मंत्रालय रायपुर जरूर आये आपका योगदान आने वाले समय मे इतिहास बनेगा।

Tuesday, September 8, 2026

कैशलेस चिकित्सा और लंबित महंगाई भत्ते पर कैबिनेट बैठक में फैसला करे सरकार



 विधानसभा में घोषणा के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की लेटलतीफी, हजारों कर्मचारी कैशलेस इलाज से वंचित—बीमारी के साथ आर्थिक बोझ भी झेलने को मजबूर

रायपुर- छत्तीसगढ़ के हजारों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित से जुड़े कैशलेस चिकित्सा सुविधा एवं लंबित महंगाई भत्ते के मुद्दे पर अब राज्य सरकार की आज होने वाली कैबिनेट बैठक में ठोस निर्णय लेने की मांग जोर पकड़ने लगी है। नवीन शिक्षक संघ छ. ग. के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत का कहना है कि विधानसभा में कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर घोषणा किए जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की धीमी कार्यप्रणाली के कारण आज भी बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिजन इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत का कहना है कि गंभीर बीमारी अथवा आकस्मिक चिकित्सा की स्थिति में सरकारी कर्मचारी को अस्पताल में इलाज के लिए तत्काल बड़ी राशि की व्यवस्था करनी पड़ती है। यदि सरकार द्वारा घोषित कैशलेस व्यवस्था समय पर लागू हो जाती तो कर्मचारियों को अपनी जमा-पूंजी, कर्ज या अन्य आर्थिक साधनों पर निर्भर नहीं होना पड़ता। सरकारी घोषणा और धरातल पर सुविधा के बीच का यह अंतर अब कर्मचारियों के लिए गंभीर आर्थिक परेशानी का कारण बन रहा है।

बीमारी के साथ आर्थिक संकट क्यों झेले कर्मचारी?

प्रदेश पदाधिकारी गिरीश साहू, अमितेश तिवारी, दुष्यंत कुम्भकार, राजेश शुक्ला का कहना है कि सरकारी सेवा में अपना पूरा जीवन लगाने वाले कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलना उनका जायज अधिकार है। जब सरकार स्वयं कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था लागू करने की घोषणा कर चुकी है, तो फिर विभागीय प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब क्यों किया जा रहा है?

रूपेंद्र सिन्हा, संजय साहू, अजय कड़व, नरेश गुप्ता, प्रकाश चंद कांगे, सतीस टंडन, चंद्र शेखर रात्रे ने सवाल उठाया है कि जब विधानसभा में घोषणा हो चुकी है तो स्वास्थ्य विभाग को कैशलेस चिकित्सा योजना के क्रियान्वयन में और कितना समय लगेगा? कर्मचारियों की मांग है कि कैबिनेट इस मामले को प्राथमिकता से लेते हुए आवश्यक निर्णय करे और घोषणा को तत्काल धरातल पर उतारे।

लंबित महंगाई भत्ते पर भी सरकार ले निर्णय

मनोज चंद्रा, शंकरलाल भार्गव, ब्रिज नारायण मिश्रा, वीरेंद्र जायसवाल, राजेश पाण्डेय ने कहा है की केसलेस चिकित्सा के साथ ही कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते को लेकर भी सरकार से कैबिनेट बैठक में स्पष्ट एवं सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की जा रही है। बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों को उनके लंबित डीए का लाभ नहीं मिलने से परिवारों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।

महिला प्रकोष्ठ के उमा जाटव, गंगा शरण पासी, बलविंदर कौर, ज्योति सक्सेना, नंदनी देशमुख, गीता चंद्राकर, रूपा साहू,का कहना है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों के वेतन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसे लंबे समय तक लंबित रखना कर्मचारियों के आर्थिक हितों के साथ न्याय नहीं है। सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए लंबित डीए के भुगतान की दिशा में स्पष्ट निर्णय करना चाहिए।

कैबिनेट से दो बड़ी उम्मीदें

कर्मचारियों की मांग है कि आगामी कैबिनेट बैठक में—

1. विधानसभा में घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया जाए।

2. लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान पर स्पष्ट निर्णय लेकर कर्मचारियों को राहत दी जाए।

संजीव मानिकपुरी , वेदप्रकाश साहू , छन्नू लाल साहू , वेदराम साहू , मनीष साहू ,रमन शर्मा , चंद्रिका पाण्डेय , हरिकांत अग्निहोत्री , बसंत जोगी, अमित मैसी ने कहा है कि सरकार यदि इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेती है तो प्रदेश के लाखों कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को सीधी राहत मिलेगी। अब कर्मचारियों की निगाहें आज होने वाले राज्य सरकार के कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। 

Sunday, September 6, 2026

सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का पालन करे सरकार: TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को मिले वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति



RTE लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के साथ न्याय की मांग, TET के लिए प्रतिवर्ष तीन अवसर देने की अपील

रायपुर- शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ के प्रदेश संचालक रविन्द्र राठौर विकास सिंह राजपूत, प्रदीप पाण्डेय, लैलून भारद्वाज ने राज्य सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में दिए गए निर्णय की भावना और निर्देशों का पालन करते हुए TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के साथ न्याय किया जाए।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 20 सितंबर 2018 के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि जिस समय संबंधित शिक्षकों की नियुक्ति/सेवा हुई, उस समय Teacher Eligibility Test (TET) की अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए केवल TET योग्यता नहीं होने के आधार पर उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। आदेश में संबंधित शिक्षकों को TET पर जोर दिए बिना अवशोषण का लाभ देने की बात कही गई थी।

विकास सिंह राजपूत ने कहा कि RTE लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंड के कारण इन शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा-सुरक्षा प्रभावित होना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और न्यायपूर्ण नीति बनानी चाहिए।

*वरिष्ठता के आधार पर हो पदोन्नति*

शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक रविंद्र राठौर व प्रदीप पाण्डेय लैलून भारद्वाज ने मांग की है कि TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को उनकी वरिष्ठता और पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति का अवसर दिया जाए। पदोन्नति को बाद में लागू हुई TET अनिवार्यता के कारण रोका नहीं जाना चाहिए।

साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में शिक्षकों को TET की पात्रता हासिल करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। इसके लिए प्रतिवर्ष कम से कम तीन अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि जो शिक्षक TET उत्तीर्ण करना चाहते हैं, वे निर्धारित अवधि में अपनी पात्रता पूरी कर सकें।

*“नियमों में बदलाव का खामियाजा पुराने शिक्षकों को न भुगतना पड़े”*

बसंत कौशिक, गिरीश साहू व सैय्यद इरफ़ान, सिराज बक्स, अमितेश तिवारी, दुष्यन्त कुम्भकार, देवेंद्र हरमुख ने कहा कि शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय जो नियम और योग्यता शर्तें लागू थीं, उनके आधार पर सेवा में प्रवेश किया था। बाद में नियमों में हुए बदलाव का पूरा भार पुराने शिक्षकों पर डालना उचित नहीं होगा।

 *सरकार से अपील करते हुए कहा*—

“सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भावना का सम्मान करते हुए RTE लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए तथा TET की पात्रता पूरी करने के लिए प्रतिवर्ष तीन अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्याय होगा और उनकी सेवा-सुरक्षा एवं पदोन्नति सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।”

— विकास सिंह राजपूत

प्रदेश संचालक, शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ 

Sunday, August 30, 2026

राखी की लाज रखना होगा सरकार को, शिक्षिका बहनों ने मांगा ‘टेट मुक्त पदोन्नति’ का तोहफा





मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र, सेवा-पदोन्नति सुरक्षा और वेतन विसंगति दूर करने की मांग

दुर्ग/बगिया- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की सैकड़ों शिक्षिका बहनों ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री की कलाई पर राखी बांधकर शिक्षक हित में बड़ा निर्णय लेने की मांग की। 27 अगस्त को रविंद्र राठौर, विकास सिंह राजपूत एवं प्रदीप पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित विशाल रक्षा सूत्र न्याय यात्रा के दौरान शिक्षिका बहनें मुख्यमंत्री निवास बगिया एवं शिक्षामंत्री निवास दुर्ग पहुंचीं और शिक्षक साझा मंच की प्रमुख मांगों को सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखा।

बलविंदर कौर, नंदिनी देशमुख, रूपा साहू, तेश्वरी साहू, सहित सभी शिक्षिका बहनों ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री को भाई मानकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा है। बदले में उन्हें कोई व्यक्तिगत उपहार नहीं चाहिए, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षक भाइयों के भविष्य, सेवा और पदोन्नति की सुरक्षा चाहिए। उन्होंने मांग की कि RTE लागू होने के पूर्व से सेवारत शिक्षकों की पदोन्नति पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार बिना TET की अनिवार्यता के की जाए।

“राखी बांधी है, अब वचन निभाने की बारी”

रक्षा सूत्र न्याय यात्रा के माध्यम से शिक्षकों ने सरकार से TET से सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति सुरक्षा देने की मांग भी दोहराई। इसके साथ ही सहायक शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति को दूर करने तथा मोदी की गारंटी में किए गए शिक्षक हितैषी वादों को शीघ्र पूरा करने की मांग रखी गई।

शिक्षिका बहनों ने सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा कि जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, उसी तरह सरकार भी शिक्षकों के हितों की रक्षा का वचन निभाए। उनका कहना था कि “हमने सरकार की कलाई पर राखी बांधी है, अब सरकार इस राखी की लाज रखते हुए शिक्षकों को टेट मुक्त पदोन्नति का तोहफा दे।”

सरकार के अगले कदम पर टिकी शिक्षकों की नजर

नवीन शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत का कहना है कि यदि सरकार शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति के स्पष्ट दिशा-निर्देश शीघ्र जारी करती है, तो प्रदेश के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी और लंबे समय से चल रहे संघर्ष का समाधान संभव होगा।

अब शिक्षकों की नजर मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन पर है। आने वाले दिनों में सरकार पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति को लेकर दिशा-निर्देश कब तक जारी करती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

सहायक शिक्षक समग्र फेडरेशन के अध्यक्ष रविंद्र राठौर व सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने उम्मीद जताई है कि सरकार शिक्षिका बहनों द्वारा बांधे गए रक्षा सूत्र की लाज रखते हुए शिक्षक हित में शीघ्र निर्णय लेगी। यदि मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल होती है तो शिक्षक आंदोलन की बजाय सरकार के साथ मिलकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

शिक्षक साझा मंच की प्रमुख मांगें

▪️ RTE लागू होने के पूर्व से सेवारत शिक्षकों की बिना TET पदोन्नति

▪️ TET से सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति सुरक्षा

▪️ सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति का निराकरण

▪️ मोदी की गारंटी के शिक्षक हितैषी वादों को शीघ्र पूरा करना

▪️ पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना

*नवीन शिक्षक संघ छ. ग. के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत का कहना है की अब सवाल सिर्फ पदोन्नति का नहीं है,सवाल उस राखी की लाज का है जो शिक्षिका बहनों ने सरकार की कलाई पर बांधी है*। 

Wednesday, August 26, 2026

शिक्षक साझा मंच की रणनीति से TET, पदोन्नति और वेतन पर पहली बार सरकार का रुख स्पष्ट


सेवा सुरक्षा, पदोन्नति सुरक्षा और वेतन सुधार को लेकर मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधिमंडल को दिया भरोसा

रायपुर - छत्तीसगढ़ के शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़, छ. ग. सहायक शिक्षक समग्र फेडरेशन, सर्व शिक्षक संघ छ. ग. व सयुंक्त महासंघ की रणनीति और लगातार किए जा रहे प्रयासों के बीच पहली बार सरकार की ओर से TET, पदोन्नति और वेतन सुधार को लेकर स्पष्ट रुख सामने आया है। शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से अलग-अलग मुलाकात कर शिक्षकों की प्रमुख समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा।

प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान सरकार की ओर से वर्ष में तीन बार स्थानीय एजेंसी के माध्यम से विभागीय TET आयोजित करने के संबंध में सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया गया। इससे लंबे समय से TET के कारण सेवा सुरक्षा को लेकर चिंतित शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

वहीं पदोन्नति के मुद्दे पर पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार प्रक्रिया शुरू करने को लेकर विधि एवं विधायी विभाग से चर्चा करने की बात कही गई। शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि जिन शिक्षकों को पूर्व में निर्धारित नियमों के तहत पदोन्नति का अवसर मिलता रहा है, उन्हें वर्तमान में नए प्रावधानों के कारण पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

वेतन विसंगति पर भी जल्द होगी निर्णायक चर्चा

शिक्षकों की एक अन्य महत्वपूर्ण मांग वेतन सुधार एवं वेतन विसंगति दूर करने को लेकर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि शिक्षक साझा मंच के साथ शीघ्र ही चर्चा कर पूरी गणना और तथ्यों के साथ वित्त मंत्री के समक्ष वेतन सुधार का विषय रखा जाएगा।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि वेतन विसंगति के कारण लंबे समय से शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि गणना के आधार पर ठोस समाधान की आवश्यकता है।

दो प्रतिनिधिमंडलों ने की अलग-अलग मुलाकात

शिक्षक साझा मंच का प्रतिनिधिमंडल दो भागों में विभक्त होकर मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से अलग-अलग मिला। एक प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र राठौर, विकास सिंह राजपूत, प्रदीप पाण्डेय, बसंत कौशिक, गिरीश साहू, अजय कड़वा, देवेंद्र हरमुख, छन्नू लाल साहू, रामलाल साहू, कृष्णा वर्मा एवं अशोक ध्रुवे शामिल रहे।

वहीं दूसरे प्रतिनिधिमंडल में मनीष मिश्रा, अश्वनी कुर्रे, अजय गुप्ता सहित अन्य शिक्षक प्रतिनिधि शामिल रहे।

शिक्षकों में जगी उम्मीद

रविंद्र राठौर, विकास सिंह राजपूत व प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि सेवा सुरक्षा, पदोन्नति सुरक्षा और वेतन सुधार तीनों विषय शिक्षकों के भविष्य से सीधे जुड़े हुए हैं। सरकार द्वारा इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल और विभागीय स्तर पर चर्चा का भरोसा मिलना आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने आगे

कहा कि शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। लैलून भारद्वाज,कृष्ण कुमार नवरंग,भूपेंद्र बनाफर, चेतन बघेल सहित सयुंक्त महासंघ के अन्य शिक्षक नेताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार अपने आश्वासन को शीघ्र ही ठोस निर्णय में परिवर्तित करेगी, जिससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों को राहत मिल सके। 

Tuesday, August 18, 2026

सेवा व पदोन्नति सुरक्षा हेतु 22 अगस्त को सभी विकासखंडों में धरना-प्रदर्शन एवं रैली


पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार टीईटी एवं बीएड की बाध्यता के बिना पदोन्नति देने की मांग को लेकर शिक्षक होंगे लामबंद

रायपुर - प्रदेश में शिक्षकों की सेवा एवं पदोन्नति सुरक्षा को लेकर शिक्षक संगठनों द्वारा आंदोलन को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में 22 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी विकासखंडों में धरना-प्रदर्शन एवं रैली आयोजित कर शासन-प्रशासन के समक्ष शिक्षकों की प्रमुख मांगों को रखा जाएगा।

सहायक शिक्षक समग्र फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत एवं सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने संयुक्त रूप से शिक्षकों से 22 अगस्त के आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है।

बसंत कौसिक, सिराज बक्स, उमा जाटव, गिरीश साहू, व मो. यासिर इरफ़ान का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदोन्नति पूर्व प्रचलित सेवा नियमों के तहत हुई है, उनकी सेवा एवं पदोन्नति के बीच में नए नियमों की बाध्यता लागू कर उन्हें प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। संगठनों ने मांग की है कि पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार टीईटी एवं बीएड की बाध्यता के बगैर पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ दिया जाए तथा उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।



शिक्षक संगठनों ने कहा कि लंबे समय से शिक्षक अपनी सेवा एवं पदोन्नति सुरक्षा को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। शिक्षकों की समस्याओं का न्यायसंगत समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

रविंद्र राठौर, विकास सिंह राजपूत एवं प्रदीप पाण्डेय ने प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील की है कि 22 अगस्त को अपने-अपने विकासखंड मुख्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन एवं रैली में एकजुट होकर शामिल हों और “सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति सुरक्षा” की आवाज को मजबूती प्रदान करें।

आंदोलन के माध्यम से शिक्षक संगठनों ने शासन से मांग की है कि शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूर्व प्रचलित नियमों के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए और टीईटी एवं बीएड की बाध्यता से प्रभावित शिक्षकों को न्याय प्रदान किया जाए। 

Monday, August 17, 2026

बेमेतरा में पदोन्नत शिक्षकों से TET प्रमाण पत्र मांगने पर शिक्षक संगठनों का जोरदार प्रदर्शन, DEO कार्यालय का घेराव




बेमेतरा - पदोन्नत शिक्षकों से TET प्रमाण पत्र की जानकारी मांगे जाने के विरोध में सोमवार को बेमेतरा में शिक्षक संगठनों ने एकदिवसीय धरना प्रदर्शन एवं रैली निकालकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ एवं सर्व शिक्षक संघ के संयुक्त आह्वान पर बड़ी संख्या में शिक्षक आंदोलन में शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने पदोन्नति प्रक्रिया में TET की अनिवार्यता को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों का कहना था कि जिन शिक्षकों की पदोन्नति पूर्व प्रचलित नियमों के आधार पर की गई है, उनसे पदोन्नति के बाद TET प्रमाण पत्र की जानकारी मांगना उचित नहीं है। इससे पदोन्नत शिक्षकों के बीच असमंजस एवं असुरक्षा की स्थिति निर्मित हो रही है।

“बीच खेल में नियम नहीं बदला जा सकता” — विकास सिंह राजपूत

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि “बीच खेल में नियम नहीं बदला जा सकता।” उन्होंने कहा कि शिक्षक जिस नियम और प्रक्रिया के तहत सेवा में आए तथा जिन प्रचलित नियमों के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ी, उसमें बीच में नई शर्त जोड़कर शिक्षकों को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठनों की मांग स्पष्ट है कि पूर्व से सेवारत एवं पदोन्नत शिक्षकों के मामले में पूर्व प्रचलित सेवा नियमों का सम्मान किया जाए तथा पदोन्नति को TET की नई शर्त से प्रभावित न किया जाए। उन्होंने शासन एवं शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षकों की सेवा एवं पदोन्नति सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

रविंद्र राठौर ने किया प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षकों से एकजुट होने का आह्वान

सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों से एकजुट होकर “सेवा सुरक्षा, न्याय आंदोलन” में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि TET के विरोध में सभी शिक्षक अपना सहयोग प्रदान करें, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो और सभी शिक्षकों को न्याय मिल सके।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक शिक्षक या एक वर्ग की समस्या नहीं है, बल्कि शिक्षकों की सेवा एवं पदोन्नति सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत करें।

रैली निकालकर DEO कार्यालय का घेराव

धरना प्रदर्शन के पश्चात शिक्षकों ने रैली निकालकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर घेराव किया तथा अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने पदोन्नति में TET की अनिवार्यता का विरोध करते हुए पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि यदि शासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया, तो आंदोलन को आगामी चरणों में और व्यापक रूप दिया जाएगा। सेवा सुरक्षा, पदोन्नति सुरक्षा एवं न्याय की मांग को लेकर शिक्षक संगठनों ने एकजुट संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया धरना प्रदर्शन मे सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, नवीन शिक्षक संघ छ. ग. के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत, मनीष मिश्रा, बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुर्रे, देवेंद्र हरमुख, अशोक ध्रुवे, पोखन साहू, इरफ़ान जी, उमा जाटव,विजय डेहरे,सैबान बेग,टिकेंद्र राजपूत,सत्यनारायण वर्मा,दीपक राजपूत, दीपक साहू, सहित हजारों की संख्या मे शिक्षक धरना प्रदर्शन रैली मे शामिल होकर जिला शिक्षा कार्यालय का घेराव किये।