एक ही विषय पर दो अलग-अलग आदेशों से शिक्षक असमंजस में, बिना पुस्तक वितरण पढ़ाई कैसे होगी? — नवीन शिक्षक संघ ने उठाए सवाल
रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को पुस्तकों के वितरण से पूर्व उनकी अनिवार्य स्कैनिंग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर बेमेतरा जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अध्यापन कार्य के दौरान पुस्तक स्कैनिंग नहीं की जाएगी तथा यह कार्य शिक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद ही किया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इन दोनों निर्देशों के कारण प्रदेशभर के शिक्षकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि एक ओर विभाग बिना स्कैनिंग पुस्तकों के वितरण नहीं करने का निर्देश दे रहा है, जबकि दूसरी ओर डीईओ द्वारा शिक्षण कार्य के बाद स्कैनिंग करने की बात कही जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब तक पुस्तकें स्कैन नहीं होंगी तब तक विद्यार्थियों को पुस्तकें कैसे मिलेंगी और बिना पुस्तकों के गुणवत्तापूर्ण अध्ययन कैसे संभव होगा?
संघ ने बताया कि वर्तमान में पुस्तक स्कैनिंग कार्य सर्वर की धीमी गति, नेटवर्क की समस्या तथा तकनीकी बाधाओं के कारण अत्यंत धीमी गति से हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के चलते एक-एक पुस्तक की स्कैनिंग में काफी समय लग रहा है। ऐसी स्थिति में यदि स्कैनिंग पूर्ण होने तक पुस्तक वितरण रोक दिया जाता है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षा विभाग को इस विषय पर एक स्पष्ट एवं व्यवहारिक निर्देश जारी करना चाहिए, ताकि शिक्षक भ्रम की स्थिति से बाहर निकल सकें। संघ ने मांग की है कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पहले पुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए तथा स्कैनिंग कार्य बाद में अथवा वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से कराया जाए।
नवीन शिक्षक संघ ने शासन से आग्रह किया है कि विरोधाभासी आदेशों को समाप्त कर प्रदेशभर में एक समान नीति लागू की जाए, जिससे न तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो और न ही विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें मिलने में कोई बाधा उत्पन्न हो।
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