Saturday, July 18, 2026

एक ही विषय पर दो अलग-अलग आदेशों से शिक्षक असमंजस में, बिना पुस्तक वितरण पढ़ाई कैसे होगी? — नवीन शिक्षक संघ ने उठाए सवाल



रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को पुस्तकों के वितरण से पूर्व उनकी अनिवार्य स्कैनिंग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर बेमेतरा जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अध्यापन कार्य के दौरान पुस्तक स्कैनिंग नहीं की जाएगी तथा यह कार्य शिक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद ही किया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इन दोनों निर्देशों के कारण प्रदेशभर के शिक्षकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि एक ओर विभाग बिना स्कैनिंग पुस्तकों के वितरण नहीं करने का निर्देश दे रहा है, जबकि दूसरी ओर डीईओ द्वारा शिक्षण कार्य के बाद स्कैनिंग करने की बात कही जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब तक पुस्तकें स्कैन नहीं होंगी तब तक विद्यार्थियों को पुस्तकें कैसे मिलेंगी और बिना पुस्तकों के गुणवत्तापूर्ण अध्ययन कैसे संभव होगा?

संघ ने बताया कि वर्तमान में पुस्तक स्कैनिंग कार्य सर्वर की धीमी गति, नेटवर्क की समस्या तथा तकनीकी बाधाओं के कारण अत्यंत धीमी गति से हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के चलते एक-एक पुस्तक की स्कैनिंग में काफी समय लग रहा है। ऐसी स्थिति में यदि स्कैनिंग पूर्ण होने तक पुस्तक वितरण रोक दिया जाता है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा।

प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षा विभाग को इस विषय पर एक स्पष्ट एवं व्यवहारिक निर्देश जारी करना चाहिए, ताकि शिक्षक भ्रम की स्थिति से बाहर निकल सकें। संघ ने मांग की है कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पहले पुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए तथा स्कैनिंग कार्य बाद में अथवा वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से कराया जाए।

नवीन शिक्षक संघ ने शासन से आग्रह किया है कि विरोधाभासी आदेशों को समाप्त कर प्रदेशभर में एक समान नीति लागू की जाए, जिससे न तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो और न ही विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें मिलने में कोई बाधा उत्पन्न हो। 

Friday, July 17, 2026

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के सतत प्रयासों का असर, दुर्ग सहित अन्य शिक्षा संभागों में 01 अप्रैल 2026 की स्थिति से वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश



दुर्ग - नवीन शिक्षक संघ छ. ग. के प्रदेश सचिव गिरीश साहू, जिलाध्यक्ष दुर्ग संजीव मानिकपुरी ने बताया है की 

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों और विभागीय स्तर पर उठाई गई मांगों का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। दुर्ग शिक्षा संभाग सहित अन्य शिक्षा संभाग कार्यालयों द्वारा भी 01 अप्रैल 2026 की स्थिति में विभागीय/संभागीय वरिष्ठता सूची तैयार करने तथा प्राप्त दावा-आपत्तियों के निराकरण के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग द्वारा जारी स्मरण पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 01.04.2026 की स्थिति में प्रकाशित सहायक शिक्षक (एलबी), स्नातक एवं प्रशिक्षित (ई/टी संवर्ग) की प्रावधिक वरिष्ठता सूची पर प्राप्त दावा-आपत्तियों का नियमानुसार निराकरण कर निर्धारित प्रारूप में शीघ्र कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए, ताकि अंतिम वरिष्ठता सूची का प्रकाशन समयबद्ध रूप से किया जा सके।

ब्लॉक अध्यक्ष संजय शर्मा धमधा, दीपक साहू दुर्ग व जागेश्वर चंद्राकर पाटन ने आगे कहा है कि नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने प्रारंभ से ही यह मांग उठाई थी कि राजपत्र प्रकाशन की स्थिति के अनुरूप 01 अप्रैल 2026 की स्थिति में त्रुटिरहित वरिष्ठता सूची का प्रकाशन किया जाए तथा सभी पात्र शिक्षकों को न्याय मिले। संघ के लगातार ज्ञापन, विभागीय अधिकारियों से चर्चा एवं विभिन्न स्तरों पर किए गए प्रयासों के बाद अब इस दिशा में कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है।


नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा,

"यह केवल एक पत्र जारी होने की बात नहीं है, बल्कि सैंकड़ो शिक्षकों की वरिष्ठता संबंधी लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नवीन शिक्षक संघ लगातार यह मांग करता रहा है कि 01 अप्रैल 2026 की स्थिति में त्रुटिरहित वरिष्ठता सूची प्रकाशित कर सभी पात्र शिक्षकों को उनका वैधानिक अधिकार दिया जाए साथ ही पदोन्नत, निधन व सेवानिवृत शिक्षकों के नाम को विलोपित किया जाना चाहिए जिससे पदोन्नति सूची बनाते समय किसी भी शिक्षकों का नाम तकनीकी त्रुटि के कारण छूट न जाये।दुर्ग, रायपुर के साथ -साथ अन्य शिक्षा संभाग कार्यालय द्वारा इस दिशा में कार्रवाई प्रारंभ किया जाना चाहिए ।"

प्रदेश पदाधिकारी दुष्यंत कुम्भकार,अमितेश तिवारी,राजेश शुक्ला,नंदिनी देशमुख, गीता चंद्राकर, रूपा साहू ने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा हैं कि यदि वरिष्ठता सूची में उनके नाम, नियुक्ति तिथि, संविलियन तिथि, पद अथवा अन्य किसी प्रकार की त्रुटि हो तो निर्धारित समय सीमा में दावा-आपत्ति अवश्य प्रस्तुत करें। नवीन शिक्षक संघ प्रत्येक शिक्षक के न्यायोचित अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा तथा अंतिम त्रुटिरहित वरिष्ठता सूची के प्रकाशन तक अपना प्रयास जारी रखेगा।" 

Tuesday, July 7, 2026

समयमान व क्रमोन्नति के स्पष्टता के आभाव मे विकल्प भरने हेतु जल्दबाजी न करे


शासन पहले जारी करे तुलनात्मक चार्ट, तभी शिक्षक-कर्मचारी लें निर्णय — विकास सिंह राजपूत

रायपुर। समयमान वेतनमान और क्रमोन्नति के विकल्प चयन को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों एवं कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शासन द्वारा इस संबंध में 9 जुलाई तक विकल्प प्रस्तुत करने की समय-सीमा निर्धारित किए जाने के बाद नवीन शिक्षक संघ ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों से बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश कोई भी विकल्प न भरने की अपील की है।

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि शासन ने समयमान वेतनमान अथवा क्रमोन्नति से संबंधित विकल्प भरने की प्रक्रिया तो शुरू कर दी है, लेकिन अब तक ऐसा कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश, तुलनात्मक विवरण या आधिकारिक चार्ट जारी नहीं किया गया है, जिससे यह समझा जा सके कि दोनों विकल्पों में से किससे शिक्षक एवं कर्मचारियों को अधिक आर्थिक लाभ, वेतनवृद्धि, पदोन्नति लाभ अथवा सेवा संबंधी सुविधा प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि यह विषय केवल औपचारिक विकल्प चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर कर्मचारियों के वर्तमान वेतन, भविष्य की आय, पेंशन संबंधी लाभ, वरिष्ठता तथा सेवा-शर्तों पर पड़ सकता है। यदि शिक्षक एवं कर्मचारी बिना समुचित जानकारी, गणना और शासन के आधिकारिक मार्गदर्शन के किसी एक विकल्प का चयन कर लेते हैं, तो भविष्य में उन्हें आर्थिक और सेवा संबंधी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विकास सिंह राजपूत ने शासन से मांग की है कि समयमान वेतनमान और क्रमोन्नति के संबंध में विस्तृत तुलनात्मक चार्ट तत्काल जारी किया जाए। इस चार्ट में यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि किस श्रेणी के शिक्षक एवं कर्मचारियों के लिए कौन-सा विकल्प अधिक लाभकारी होगा, उसकी पात्रता क्या होगी, वेतन पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा, सेवा लाभों में क्या अंतर आएगा तथा भविष्य में उसका आर्थिक लाभ या हानि किस प्रकार होगी।

नवीन शिक्षक संघ ने प्रदेश के समस्त शिक्षक साथियों एवं कर्मचारियों से अपील की है कि जब तक शासन इस विषय में स्पष्ट दिशा-निर्देश, गणनात्मक विवरण और तुलनात्मक चार्ट जारी नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में विकल्प न भरें। संघ का कहना है कि अधूरी जानकारी के आधार पर लिया गया निर्णय भविष्य में कर्मचारियों के हितों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शासन शिक्षकों एवं कर्मचारियों के हितों के प्रति गंभीर है, तो उसे समयसीमा निर्धारित करने के साथ-साथ निर्णय लेने हेतु आवश्यक सभी तथ्य और विकल्पों का पारदर्शी विश्लेषण भी उपलब्ध कराना चाहिए। तभी कर्मचारी अपने हित में सही, सुरक्षित और न्यायसंगत निर्णय ले सकेंगे।

नवीन शिक्षक संघ ने शासन से मांग की है कि समयमान एवं क्रमोन्नति से संबंधित सभी बिंदुओं पर तत्काल स्पष्टता दी जाए, ताकि प्रदेश के हजारों शिक्षक एवं कर्मचारी भ्रम की स्थिति से बाहर निकल सकें और अपने भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण निर्णय को पूरी जानकारी के साथ ले सकें।  

Thursday, July 2, 2026

राजपत्र प्रकाशन पूर्व नियुक्त शिक्षकों की TET राहत मांग पर PMO ने लिया संज्ञान प्रधानमंत्री कार्यालय ने नवीन शिक्षक संघ के मांग पत्र को स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा देश के लाखो शिक्षकों के साथ न्याय करे सरकार -विकास सिंह



देश भर के लाखो शिक्षकों का उठाया नवीन शिक्षक संघछ. ग. ने आवाज कहा सबका साथ -सबका विकास 

केंद्र सरकार करे टेट राहत के मांग पर विचार 





दिल्ली - राजपत्र प्रकाशन के पूर्व नियुक्त एवं पदोन्नत शिक्षक संवर्ग को TET की अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए मांग पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए प्रकरण को स्कूल शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित इस महत्वपूर्ण मांग पर अब विभागीय स्तर पर ठोस पहल और सकारात्मक निर्णय की दिशा में रास्ता खुल सकता है।

वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकारों का मामला

नवीन शिक्षक संघ ने अपने मांग पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि राजपत्र प्रकाशन के पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं पदोन्नत शिक्षक संवर्ग पर TET की अनिवार्यता लागू करना न्यायोचित नहीं है। संघ का कहना है कि ये शिक्षक वर्षों से शासकीय सेवा में कार्यरत हैं और विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके सेवा अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन, पेंशन तथा अन्य लाभों को प्रभावित करने वाली बाध्यता को समाप्त करते हुए न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाना चाहिए।

शिक्षक हितों की मांग को मिली प्रशासनिक गति

संघ के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस प्रकरण को स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा जाना शिक्षक हितों से जुड़े इस मुद्दे को मिली एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रगति है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि हजारों शिक्षकों की आवाज अब उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है और इस विषय पर औपचारिक प्रक्रिया के तहत विचार आगे बढ़ रहा है। प्रदेशभर के शिक्षक इसे अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि संगठन लगातार राजपत्र प्रकाशन पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत, पूर्व सेवा अवधि की गणना, तथा वेतन, पेंशन और पदोन्नति संबंधी अधिकारों की सुरक्षा की मांग को प्रमुखता से उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रकरण का स्कूल शिक्षा विभाग तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षकों की मांग अब प्रभावी रूप से शासन-प्रशासन तक पहुंच रही है। अब आवश्यकता इस बात की है कि विभाग इस विषय पर गंभीरता, संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण के साथ शीघ्र निर्णय ले।

प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत का बयान

“राजपत्र प्रकाशन पूर्व नियुक्त एवं पदोन्नत शिक्षक संवर्ग को TET की बाध्यता से राहत मिलना न्याय और सेवा अधिकारों से जुड़ा विषय है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा करना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा प्रकरण को स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा जाना हमारी मांग को मिली महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रगति है। हमें उम्मीद है कि  विभाग देश भर के lakhobशिक्षकों के हित में सकारात्मक निर्णय लेगा।”