Sunday, September 6, 2026

सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का पालन करे सरकार: TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को मिले वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति



RTE लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के साथ न्याय की मांग, TET के लिए प्रतिवर्ष तीन अवसर देने की अपील

रायपुर- शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ के प्रदेश संचालक रविन्द्र राठौर विकास सिंह राजपूत, प्रदीप पाण्डेय, लैलून भारद्वाज ने राज्य सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में दिए गए निर्णय की भावना और निर्देशों का पालन करते हुए TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के साथ न्याय किया जाए।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 20 सितंबर 2018 के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि जिस समय संबंधित शिक्षकों की नियुक्ति/सेवा हुई, उस समय Teacher Eligibility Test (TET) की अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए केवल TET योग्यता नहीं होने के आधार पर उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। आदेश में संबंधित शिक्षकों को TET पर जोर दिए बिना अवशोषण का लाभ देने की बात कही गई थी।

विकास सिंह राजपूत ने कहा कि RTE लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंड के कारण इन शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा-सुरक्षा प्रभावित होना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और न्यायपूर्ण नीति बनानी चाहिए।

*वरिष्ठता के आधार पर हो पदोन्नति*

शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक रविंद्र राठौर व प्रदीप पाण्डेय लैलून भारद्वाज ने मांग की है कि TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को उनकी वरिष्ठता और पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति का अवसर दिया जाए। पदोन्नति को बाद में लागू हुई TET अनिवार्यता के कारण रोका नहीं जाना चाहिए।

साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में शिक्षकों को TET की पात्रता हासिल करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। इसके लिए प्रतिवर्ष कम से कम तीन अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि जो शिक्षक TET उत्तीर्ण करना चाहते हैं, वे निर्धारित अवधि में अपनी पात्रता पूरी कर सकें।

*“नियमों में बदलाव का खामियाजा पुराने शिक्षकों को न भुगतना पड़े”*

बसंत कौशिक, गिरीश साहू व सैय्यद इरफ़ान, सिराज बक्स, अमितेश तिवारी, दुष्यन्त कुम्भकार, देवेंद्र हरमुख ने कहा कि शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय जो नियम और योग्यता शर्तें लागू थीं, उनके आधार पर सेवा में प्रवेश किया था। बाद में नियमों में हुए बदलाव का पूरा भार पुराने शिक्षकों पर डालना उचित नहीं होगा।

 *सरकार से अपील करते हुए कहा*—

“सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भावना का सम्मान करते हुए RTE लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए तथा TET की पात्रता पूरी करने के लिए प्रतिवर्ष तीन अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्याय होगा और उनकी सेवा-सुरक्षा एवं पदोन्नति सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।”

— विकास सिंह राजपूत

प्रदेश संचालक, शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ 

No comments:

Post a Comment