शिक्षा सचिव से शिक्षक प्रतिनिधि मंडल की अहम चर्चा: 'राजपत्र प्रकाशन से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्त रखने की मांग
लाखो शिक्षकों के हित मे नवीन शिक्षक संघ छ. ग. के प्रदेश अध्यक्षविकास सिंह राजपूत ने पुरे तथ्यों के साथ स्कूल शिक्षा सचिव छ. ग. शासन से किया चर्चा
रायपुर। नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश के उन लाखों शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से मुक्त रखने की पुरजोर मांग की, जिनकी नियुक्ति एवं पदोन्नति संबंधित राजपत्र के प्रकाशन से पूर्व हो चुकी थी।
2017 से 2025 तक विभाग ने अंधेरे में रखा: विकास सिंह राजपूत
शिक्षा सचिव से चर्चा करते हुए प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि:
NCERT का संशोधन: वर्ष 2017 में NCERT द्वारा नियमों में संशोधन कर प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति और पदोन्नति हेतु TET को अनिवार्य किया गया था।
विभाग की लापरवाही: स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा साल 2017 से लेकर 2025 तक इस संबंध में न तो कोई दिशा-निर्देश जारी किए गए और न ही विद्यालयों में सेवारत शिक्षकों को इसकी कोई जानकारी दी गई।
लाखों शिक्षकों का नुकसान: विभाग द्वारा समय पर जानकारी न दिए जाने के कारण प्रदेश के लाखों शिक्षक इस परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में अब उन पर यह नियम थोपना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
"TET लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने तत्कालीन निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के तहत सेवा में प्रवेश किया था। बाद में लागू किए गए प्रावधानों को पिछली तारीखों से प्रभावी करना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है।" > — विकास सिंह राजपूत, प्रदेश अध्यक्ष (नवीन शिक्षक संघ छ.ग.)
अन्य राज्यों की तर्ज पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग
प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा सचिव के सामने मांग रखी कि हजारों शिक्षकों के भविष्य और हितों को ध्यान में रखते हुए शासन को एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। संघ ने प्रमुखता से मांग की है कि देश के अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग भी शिक्षकों के हित में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करे।
शिक्षा सचिव ने दिया आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन
शिक्षक संघ की दलीलों और तथ्यों को सुनने के बाद, शिक्षा सचिव ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि संघ द्वारा प्रस्तुत मांगों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग द्वारा ऐसी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी जिससे किसी भी सेवारत शिक्षक के साथ अन्याय न हो।
प्रतिनिधि मंडल में ये रहे शामिल: इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के साथ मुख्य रूप से तीरथ मार्कण्डेय, अशोक देवांगन, अनिल मार्कण्डेय और सतीस टंडन उपस्थित थे।
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